मीरा मुराती
अल्बानियाई मूल की पूर्व मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारी मीरा मुराती पिछले कुछ दिनों से दुनिया भर में सुर्खियों में हैं. दरअसल, उन्होंने अपनी खुद की स्टार्टअप कंपनी OpenAI स्थापित की है. उसके बाद से अधिकांश लोग उनकी बैकग्राउंड और नेटवर्थ के बारे में जानकारी चाहते हैं. अल्बानिया से टेस्ला और ओपनएआई में प्रमुख पदों तक का उनका सफर इंजीनियरिंग से प्रेरित उनके करियर और एआई के प्रति उनका जुनून से अचंभित करने वाला है.
मार्क जुकरबर्ग के ऑफर को ठुकराया
जुकरबर्ग ओपनएआई की पूर्व मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारी के रूप में मीरा मुराती जैसे-जैसे वैश्विक स्तर पर प्रसिद्धि पा रही हैं, उनकी पृष्ठभूमि के बारे में जानने की लोगों में इच्छा उतनी की बढ़ती जा रही है. मीरा मुराती ने कथित तौर पर जुकरबर्ग के मेटा (पूर्व में फेसबुक) के एक नौकरी के प्रस्ताव को ठुकरा दिया. Meta के CEO मार्क जुकरबर्ग ने मीरा मुराती को 1 अरब डॉलर (8700 करोड़ रुपये) के आकर्षक ऑफर दिया था. जुकरबर्ग ने ये ऑफर मेटा के नए सुपरइंटेलिजेंस लैब में शामिल होने के लिए दिया था.
मीरा और उनकी पूरी टीम ने अपने विजन को प्राथमिकता दी. उनका यह रुख ओपनएआई के प्रति उनके जुनून को दर्शाता है. मुराती ने मेटा को ज्वाइन करने के बदले ओपनएआई में रिस्पांसिबल एआई विकसित करने पर अपना ध्यान केंद्रित करने का फैसला लिया .
कुल संपत्ति कितनी है?
मीरा मुराती की कुल संपत्ति का सार्वजनिक रूप से खुलासा नहीं किया गया है. कुछ रिपोर्टों के आधार पर यह कहा जा सकता है कि ओपनएआई में उनकी इक्विटी हिस्सेदारी और कार्यकारी वेतन को देखते हुए उनकी कुल संपत्ति करोड़ों डॉलर में है. संभवतः $50 लाख से $100 लाख अमेरिकी डॉलर के बीच. Thinking Machines Lab में उनके equity stake के आधार पर 2025 में उनका मूल्यांकन लगभग $1.4 बिलियन माना जा रहा है, क्योंकि उनकी स्टार्टअप की वैल्यू $10–12 बिलियन के आसपास है. उनकी हिस्सेदारी अनुमानित रूप से 10‑15 प्रतिशत हो सकती है.
क्या मीरा मुराती भारतीय हैं?
नहीं, मीरा मुराती भारतीय नहीं हैं. उनका जन्म और पालन-पोषण अल्बानिया में हुआ, जो दक्षिण-पूर्वी यूरोप का एक छोटा लेकिन सांस्कृतिक रूप से समृद्ध देश है. हालांकि उनका नाम कुछ लोगों को दक्षिण एशियाई लग सकता है, लेकिन उनकी विरासत पूरी तरह से अल्बानियाई है. अल्बानिया में शुरुआती साल बिताने के बाद मुराती बाद में कनाडा और अंततः संयुक्त राज्य अमेरिका चली गईं, जहां उन्होंने उच्च शिक्षा प्राप्त की और एक शक्तिशाली तकनीकी करियर शुरू किया.
एयरोस्पेस से एआई तक का सफर
मुराती ने डार्टमाउथ कॉलेज से इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की और जोडिएक एयरोस्पेस में काम करते हुए एयरोस्पेस में करियर की शुरुआत की। वहां से वह टेस्ला में शामिल हुईं, जहां उन्होंने मॉडल एक्स के विकास में योगदान दिया, लेकिन जल्द ही उनकी रुचि एआई और ह्यूमन कंप्यूटर नेटवर्क में बढ़ने पर वह की ओर से जुड़ गईं. 2018 में उन्हें ओपनएआई में लाया गया, जहां वह तेजी से आगे बढ़कर मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारी और 2023 के अंत तक सीईओ बन गईं.
फेलिक्सक गेराल्ड को पुलिस ने किया अरेस्ट
Karur Stampede Update: तमिलनाडु पुलिस ने मंगलवार (30 सितंबर) को मशहूर यूट्यूबर फेलिक्स गेराल्ड को गिरफ्तार कर लिया. उन पर आरोप है कि उन्होंने हाल ही में करूर में हुई त्रासदीपूर्ण भगदड़ पर भ्रामक और अपमानजनक टिप्पणी की थी. यह हादसा 27 सितंबर को तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) नेता विजय की चुनावी रैली में हुआ था, जिसमें महिलाओं और बच्चों सहित 41 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई थी.
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, गेराल्ड का हालिया वीडियो जांच में संदिग्ध पाया गया और यह माना गया कि उनकी टिप्पणी से सामाजिक अशांति फैल सकती है. वीडियो को भ्रामक करार देते हुए पुलिस ने कहा कि इस तरह की सामग्री गलत सूचना फैलाकर सार्वजनिक शांति को बिगाड़ सकती है. इससे पहले ही तमिलनाडु पुलिस ने स्पष्ट चेतावनी दी थी कि कोई भी व्यक्ति अगर अफवाहें फैलाता है या डर का माहौल बनाने वाली सामग्री शेयर करता है, तो उसके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी.
पार्टी नेताओं पर भी केस
गेराल्ड की गिरफ्तारी उस समय हुई जब पुलिस ने टीवीके के वरिष्ठ नेताओं के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने की पुष्टि की. इनमें पार्टी के चुनाव अभियान प्रबंधन के महासचिव एन. आनंद उर्फ ‘बुस्सी’ आनंद, राज्य संयुक्त सचिव निर्मल कुमार और करूर पश्चिम जिला सचिव मथियाझगन शामिल हैं.
करूर टाउन पुलिस ने मामले में भारतीय दंड संहिता (IPC) की पांच धाराओं का हवाला दिया है, जिनमें लापरवाही से मौत और सार्वजनिक सुरक्षा आदेशों की अवहेलना जैसी धाराएं शामिल हैं. मथियाझगन को पहले ही गिरफ्तार कर लिया गया है और उनसे विशेष पुलिस दल पूछताछ कर रहा है.
सरकार और विपक्ष आमने-सामने
इस घटना के बाद करूर पहुंचे मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने सरकार की जिम्मेदारी दोहराई और कहा कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा. उन्होंने बताया कि हादसे की जांच के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश अरुणा जगदीशन की अध्यक्षता में जांच आयोग गठित कर दिया गया है. स्टालिन ने कहा, “यह हमारी जिम्मेदारी है कि ऐसी घटना दोबारा न हो. अफवाहें फैलाने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी.”
वहीं, विपक्षी अन्नाद्रमुक नेता एडप्पादी के. पलानीस्वामी ने इस घटना को लेकर द्रमुक सरकार पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि सरकार भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा उपायों को लेकर पूरी तरह नाकाम रही है. पलानीस्वामी ने मांग की कि जांच पारदर्शी होनी चाहिए और यह केवल दिखावा न हो.
विजय का शोक और सहयोग का वादा
टीवीके प्रमुख विजय ने हादसे पर गहरा दुख व्यक्त किया. उन्होंने कहा, “मेरी संवेदनाएं उन परिवारों के साथ हैं जिन्होंने अपनों को खोया है. पार्टी सभी जांचों में पूरा सहयोग करेगी और पीड़ित परिवारों को न्याय और राहत दिलाने के लिए हर संभव मदद करेगी.” उनकी पार्टी ने शोक संतप्त परिवारों को आर्थिक सहायता देने का भी वादा किया है.
सुरक्षा को लेकर उठे सवाल
करूर की इस घटना ने तमिलनाडु की राजनीति में हलचल मचा दी है. राजनीतिक रैलियों और बड़े आयोजनों में सुरक्षा इंतजामों को लेकर अब गंभीर बहस छिड़ गई है. राज्य सरकार ने कहा है कि वह भीड़ प्रबंधन और सार्वजनिक समारोहों के लिए कड़े दिशानिर्देश तैयार कर रही है. वहीं विपक्ष का कहना है कि इस तरह की भयावह घटनाओं को रोकने के लिए स्वतंत्र निगरानी तंत्र और जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए.
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सीएम नीतीश कुमार और निशांत कुमार
बिहार की राजनीति में पोस्टर वॉर अक्सर बड़े संदेश लेकर आता है. पहली बार ऐसा हुआ है जब जनता यूनाइटेड के दफ्तर के सामने सीएम नीतीश कुमार और उनके बेटे निशांत कुमार का प्रभावी संदेश देने वाला पोस्टर लगाया गया है. इस पोस्टर ने नीतीश की राजनीति को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं. पटना के सियासी गलियारों में चर्चा है कि क्या नीतीश कुमार अब उत्तराधिकार की ओर बढ़ रहे हैं? क्या यह जेडीयू के भीतर नई पीढ़ी को आगे लाने की कोशिश है या यह सिर्फ समर्थकों की पहल भर है?
फिलहाल, मामला कुछ भी क्यों न हो? बिहार में नया पोस्टर सामने आने के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार की पॉलिटिक्स में आने की चर्चा तेज हो गई है. अब निशांत कुमार को लेकर कयास लगाया जा रहा है कि इसके जरिए निशांत को नीतीश कुमार का उत्तराधिकारी बताने का प्रयास किया गया है.
नीतीश के उत्तराधिकारी बनेंगे निशांत?
जेडीयू दफ्तर के पास निशांत कुमार का पोस्टर लगने के बाद पार्टी के नेता और कार्यकर्ता उन्हें बिहार का राजनीति में भविष्य का नेता मान रहे हैं. दरअसल, पटना स्थित जेडीयू दफ्तर के बाहर सोमवार को लगाए गए पोस्टर पर लिखा है, 'ईमानदारी और जनसेवा की नई पीढ़ी. जनसेवा की विरासत अब आगे बढ़ेगी, विकास पुरुष का बेटा, बिहार का भविष्य- निशांत कुमार. जननायक कर्पूरी ठाकुर की विचारधारा और नीतीश कुमार की कार्यशैली के वारिस- निशांत कुमार.”
उत्तराधिकारी बनाने की चर्चा
बिहार के सीएम के बेटे निशांत कुमार को लेकर अचानक से इस तरह का पोस्टर लगना कई सवाल खड़े कर रहा है. क्या जेडीयू के कार्यकर्ता अब उन्हें नीतीश कुमार का उत्तराधिकारी मान लें? या फिर यह सिर्फ कुछ समर्थकों की ओर से किया गया शक्ति प्रदर्शन है? अभी तक जेडीयू की ओर से इस पोस्टर पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है. यह पोस्टर जेडीयू कार्यालय के बाहर सोमवार को ही लगाया गया है, जो चर्चा का विषय बन गया. वैसे भी निशांत, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेहद करीबी माने जाते हैं और लंबे समय से पार्टी संगठन से जुड़े हुए हैं.
निशांत को मजबूत दिखाने की कोशिश
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि ये पोस्टर यह संकेत है कि जेडीयू अब नीतीश कुमार के बाद की राजनीति पर विचार कर रही है. हालांकि, यह भी कहा जा रहा है कि यह पोस्टर समर्थकों की व्यक्तिगत पहल हो सकती है, ताकि संगठन में निशांत की पकड़ मजबूत दिखाई जाए. नीतीश कुमार कई बार यह संकेत दे चुके हैं कि वह लंबी पारी खेलने के मूड में नहीं हैं. ऐसे में निशांत का नाम सामने आने की घटना ने जेडीयू के भीतर उत्तराधिकार की चर्चा को हवा दे दी है.
अब क्या करेंगे निशांत?
अब सवाल यह है कि निशांत कुमार विधानसभा चुनाव लड़ेंगे या अपने पिता की तरह विधान परिषद के रास्ते राजनीति में कदम रखेंगे? क्या बिहार चुनाव के बाद निशांत की बैकडोर पॉलिटिक्स में एंट्री तय है? निशांत अगर चुनाव लड़ते हैं, तो कौन सी सीट होगी उनकी पहली पसंद?
पापा के साथ पहली बार कब आए नजर
निशांत कुमार, अभी तक राजनीति से दूरी बनाए रखते थे, लेकिन पिछले कुछ समय के दौरान वह कई सार्वजनिक कार्यक्रमों में अपने पिता के साथ नजर आए हैं. जनवरी 2025 में स्वतंत्रता सेनानियों की मूर्ति अनावरण के एक कार्यक्रम में उन्होंने पहली बार राजनीतिक बयान दिया, जिसमें उन्होंने जनता से नीतीश कुमार और जेडीयू को वोट देने की अपील की.
कब की थी नीतीश को सीएम बनाने की अपील?
होली मिलन समारोह और अन्य सरकारी आयोजनों में उनकी मौजूदगी ने सियासी हलकों में वह दिखाई दिए थे. निशांत ने शिक्षा, स्वास्थ्य, और रोजगार जैसे क्षेत्रों में नीतीश सरकार की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए जनता से 2025 में फिर से नीतीश को मुख्यमंत्री बनाने की अपील की. उनके इस सक्रिय रुख ने जेडीयू कार्यकर्ताओं में उत्साह भरा है.
निशांत कुमार क्या बनेंगे डिप्टी सीएम?
कहां से लडेंगे चुनाव?
निशांत यदि राजनीति में आते हैं, तो वे हरनौत विधानसभा सीट से चुनाव लड़ सकते हैं. यह वही सीट है, जहां से नीतीश कुमार ने 1985 में पहली बार विधानसभा चुनाव जीता था.अब इस सीट से जेडीयू के हरि नारायण सिंह विधायक हैं. निशांत के लिए यह सीट खाली कराना एक चुनौती हो सकता है. इसके अलावा, नालंदा जिले की इस्लामपुर सीट से भी निशांत के चुनाव लड़ने की बात कही जा रही है. जेडीयू सांसद कौशलेंद्र कुमार ने उनकी उम्मीदवारी का समर्थन किया है.
फाइल फोटो
Pakistan Saudi Nuclear Deal: पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा मोहम्मद आसिफ ने एक ऐसा बयान दिया है जिसने खाड़ी और पश्चिम एशिया की राजनीति में हलचल पैदा कर दी है. आसिफ ने कहा है कि अगर जरूरत पड़ी तो पाकिस्तान अपना परमाणु कार्यक्रम सऊदी अरब को उपलब्ध कराएगा. उनका यह बयान पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच हुए ताजा रक्षा समझौते के बाद आया है. पहली बार इस्लामाबाद ने सार्वजनिक तौर पर यह संकेत दिया है कि उसकी परमाणु क्षमता सऊदी अरब तक भी पहुंच सकती है.
गुरुवार देर रात पाकिस्तानी न्यूज चैनल ‘जियो टीवी’ को दिए इंटरव्यू में आसिफ से सवाल पूछा गया कि क्या पाकिस्तान की परमाणु ताकत सऊदी अरब को भी मिलेगी? इस पर उन्होंने जवाब दिया, “हमारी यह क्षमता हम बहुत पहले हासिल कर चुके हैं. हमने परीक्षण किए और हमारी फौजें इस क्षमता का इस्तेमाल करने के लिए प्रशिक्षित हैं. जो भी हमारे पास है, उसे इस समझौते के तहत सऊदी अरब को दिया जाएगा.”
खाड़ी में इजरायल का असर
विश्लेषकों के मुताबिक, पाकिस्तान का यह कदम केवल रक्षा सहयोग नहीं बल्कि एक संदेश भी है. इजरायल को लंबे समय से मिडिल ईस्ट का अकेला परमाणु हथियार संपन्न देश माना जाता है. हाल ही में कतर में हमास नेताओं पर इजरायल के हमले के बाद खाड़ी देशों में सुरक्षा को लेकर चिंताएं और बढ़ गई हैं. गाजा पट्टी में जारी इजरायल-हमास संघर्ष ने पहले से ही पूरे क्षेत्र को अस्थिर बना रखा है. ऐसे माहौल में पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच यह नया रक्षा समझौता दोनों देशों के लिए रणनीतिक सुरक्षा कवच का काम कर सकता है.
समझौते में यह भी कहा गया है कि किसी एक देश पर हमला, दोनों पर हमला माना जाएगा. हालांकि अब तक पाकिस्तान और सऊदी अरब ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि इस समझौते में परमाणु हथियारों तक पहुंच का क्या मतलब है.
सऊदी अरब और पाकिस्तान का जुड़ाव
सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच दशकों से गहरे सैन्य रिश्ते रहे हैं. सऊदी अरब को पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम का अप्रत्यक्ष समर्थक भी माना जाता है. पाकिस्तान के सेवानिवृत्त ब्रिगेडियर जनरल फिरोज हसन खान ने भी एक बार कहा था कि सऊदी अरब ने पाकिस्तान को ‘खुले हाथों वित्तीय मदद’ दी, जिसकी वजह से इस्लामाबाद अपना परमाणु कार्यक्रम जारी रख सका, खासकर उस समय जब देश पर कड़े अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध लगे हुए थे.
अमेरिका ने कई बार पाकिस्तान के परमाणु और मिसाइल कार्यक्रमों पर पाबंदियां लगाईं. यहां तक कि बाइडेन प्रशासन के आखिरी दिनों में पाकिस्तानी मिसाइल परियोजना पर भी नई पाबंदियां लगाई गई थीं.
भारत-पाकिस्तान परमाणु संतुलन
पाकिस्तान ने अपना परमाणु कार्यक्रम भारत के परमाणु बमों का मुकाबला करने के लिए विकसित किया था. अमेरिकी पत्रिका ‘बुलेटिन ऑफ एटॉमिक साइंटिस्ट्स’ के अनुसार, भारत के पास अनुमानित 172 और पाकिस्तान के पास 170 परमाणु हथियार हैं. ऐसे में अब पाकिस्तान द्वारा सऊदी अरब को सुरक्षा छतरी देने का दावा पूरे क्षेत्र में नए भू-राजनीतिक समीकरण खड़े कर सकता है.